क्या है Electoral bonds पारदर्शिता या भ्रस्टाचार ?
भारतीय जनता पार्टी के अनुशार Electoral bonds पूरी तरह से पारदर्शी है और वही कांग्रेस और अन्य Opposition के अनुसार Electoral bonds एक प्रकार का Legal corruption है!
एकदम सरल शब्दों में अगर कहे तो Electoral bonds सिर्फ एक प्रकार का paper document है जिसके ऊपर इसकी value लिखी होती है और ये value 1000,10000,100000,1000000 और १ करोड़ हो सकती है और आप इन्ही कीमतों में Electoral bonds खरीद कर किसी भी Political party के दफ्तर में ले जा कर दे सकते है जिस भी Political party को आपको fund देना है और फिर वह पार्टी Electoral bonds को वापस bank में देगी और bank उस पार्टी के bank account में fund transfer कर देगी इससे ही कहते है Electoral bonds !
आइये अब सबसे पहले जानते उन तथ्यों को जिनके अनुशार BJP Electoral bonds को transparent अर्थात पारदर्शी बता रही है!
1 Electoral bonds की सबसे अच्छी बात है कीई भी Political party 2000 रूपये से ज्यादा का fund अगर लेती है तो उसे वह fund Electoral Bonds के द्वारा ही लेना होगा, एवं वह पार्टी 2000 रुपये से ज्यादा का fund cash में नहीं ले सकती, Electoral bonds के आने से पहले नियम ये था की यदि किसी Political party को 20000 रूपये से कम का fundआता था तो उस पार्टी को चंदे का स्त्रोत बताने की आवश्यकता नहीं थी इसी का फायदा उठा कर Political party कहते थे की उन्हें जो भी fund मिला है वह 20000 रूपये प्रति व्यक्ति से कम का है इसीलिए उन्हें इस चंदे का स्त्रोत बताने की आवश्यकता नहीं है जिसके द्वारा देश में black money पैदा होता था और इस black money का उपयोग चुनाव जितने के लिए किया जाता था कुछ Political party ने तो यहां तक भी दिखाया है की उन्हें 90% fund 20000 रूपये प्रति व्यक्ति से कम का ही मिलता है अर्थात ये की, जो 90% fund आता था ये सारा पैसा black money ही था जो इन पार्टिय को 20000 रुपये प्रति व्यक्ति से कम का मिलता था
2 Electoral bonds का दुसरा advantage ये है की Donation सिर्फ उस ही Political party को दिया जा सकता है जो पार्टी Election commission के द्वारा verified है और Representation of people act 1951 के section 29A के under Register है और उस Political party ने पिछले विधानसभा या लोकसभा चुनाव में कम से कम 1% वोट हासिल किया हो, कोई Political party अगर इन तीनो Criteria को पुरा करती है तो ही उस पार्टी को fund किया जा सकता है अन्यथा नहि किया सकता, इससे होगा ये की कोई भी नकली पार्टी चुनाव लड़ने के नाम पर fund नहीं ले सकेगी
3 Electoral bonds का तीसरा सबसे बड़ा advantage ये है की Donor को अपनी सारी personal detail State bank को KYC form के द्वारा देनी होगी, Donor की personal detail सार्वजनिक तो नहीं की जाएगी लेकिन SBI को जानकारी होगी की ये fund किसने Donate किया है और किसको Donate किया है !
४ Electoral bonds का चौथा सबसे बड़ा advantage ये है की कोई भी Political party उस ही बैंक अकाउंट में Donation ले सकती है जिस bank account को चनाव आयोग ने verified किया हो, इससे होगा ये की कोई भी Political party किसी दूसरे के बैंक अकाउंट में Donation का fund नहीं ले सकेगी, बैंक अकाउंट उसी Political party का होना चाहिए जिसके अकाउंट में fund आ रहे है
५ Electoral bonds का पांछवा सबसे बड़ा advantage ये है की किसी भी Political party को सिर्फ वही company या organization fund कर सकती है जो ३ साल पुरानी है, इससे होगा ये की कोई भी शेल company किसी भी Political party को fund नहीं कर सकेगी,
ये तो हुऐ Electoral bonds के advantage जिनके आधार पर ruling पार्टी बीजेपी Electoral bonds को transparent बता रही है !
अब जानते है उन तथ्यों के बारे में जिनके आधार पर ओप्पोसिशन की पार्टी Electoral bonds को एक प्रकार का लीगल करप्शन बता रही है!
1 Electoral bonds का एक Negative point ये है की fund कोन दान कर रहा है किसको दान कर रहा है और कितना दान कर रहा है ये तीनो चीज़े ही सार्वजनिक नहीं की जाएगी अर्थात ये की एक आम आदमी को किसी भी प्रकार की कोई जानकारी नहीं होगी !
२ Electoral bonds की एक negative point ये है की ruling पार्टी चाहे कोई भी हो वो SBI के द्वारा ये पता कर सकती है की किसने किस Political party को कितना fund Donate किया है क्योकि SBI आता है RBI के Under और RBI आता है सेंट्रल गवर्नमेंट के Under और ruling पार्टी Donor पर pressure बना सकती है की Donor ने उस पार्टी को fund क्यों किया
३ Electoral bonds का एक बोहत बड़ा Negative point ये है की Election commission of India ने स्वयं Electoral bonds का विरोध किया था Election commission ने भारत सरकार को ये चेतावनी दी थी की विदेशो से आने वाले गैरकानूनी चंदे को छुपाने में हमारे देश की Political party को मदद मिलेगी क्योकि अब विदेशी companies भी हमारे देश कि Political party को गैरकानूनी तरिके से fund कर सकेगी
४ Electoral bonds की सबसे बड़ी Disadvantage ये है की RBI ने भी इसका विरोध किया है, एक RTI से ये पता चला है कि RBI के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल जिन्हे खुद सरकार ने Nominate किया था गवर्नर के पद के लिए, उन्होंने ने सरकार से कहा था की Electoral bonds से money laundering act कमजोर होगा जिससे देश में money laundering बढ़ेगी !
५ Electoral bonds की एक Disadvantage ये है की ruling पार्टी चाहे कोई भी हो Electoral bonds के संदर्भ में अपनी power का missuse कर सकती है!
सरकार के नियम अनुसार Electoral bonds किसी भी वर्ष के जनवरी अप्रैल जुलाई और अक्टूबर महीने के 10 दिनों में ही खरीदे जा सकते है और जिस वर्ष लोकसभा चुनाव होने होंगे उस वर्ष लोकसभा चुनाव से पहले 30 दिनों में ही Electoral bonds खरीदे जा सकते है
लेकिन यहाँ नोट करने वाली बात ये है की भारत सरकार ने वर्ष 2018 में Electoral bonds खरीदने के लिए विंडो मार्च में भी खुलवा लिया, अप्रैल में भी खुलवा लिया, मई में भी खुलवा लिया और अक्टूबर भी खुलवा लिया, मतलब ये की भारत सरकार ने खुद के बनाये गए नियम खुद ने ही तोड़ दिए,
तो ये थे Electoral bonds के वो तथ्य जिनके आधार पर भारतीय जनता पार्टी Electoral bonds को पारदर्शी बता रही थी और opposition Electoral bonds को भ्रस्टाचार बता रही थी
इस पुरे Analysis का निष्कर्ष यही निकलता है की Electoral bonds पूरी तरह से पारदर्शी नहीं है।
हम यहाँ ये बिलकुल नहीं कह रहे है की Opposition के सारे आरोप सही है लेकिन एक बात तो पक्की है की Electoral bonds पारदर्शी नहीं है !
ये सारे तथ्य आपको main stream की मिडिया में कभी देखने को नहीं मिलेंगे
आपको हमारे इस ब्लॉग पर राजनैतिक विषयो के निष्पक्ष विस्लेसन मिलेंगे
जो आपको और कहि नहीं मिलेंगे!
धन्यवाद
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